धार नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, जनप्रतिनिधियों ने लगाए लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप | Dhar News.
धार नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, जनप्रतिनिधियों ने लगाए लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप
धार (मध्य प्रदेश): शहर की नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता और अधिकारियों की कथित लापरवाही के कारण नगर की व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ती जा रही हैं। समस्या यह भी बताई जा रही है कि जिम्मेदार अधिकारियों के पास चुने हुए प्रतिनिधियों तक से मिलने का समय नहीं है, जिससे जनता से जुड़े मुद्दों का समाधान प्रभावित हो रहा है।
दिन-प्रतिदिन बिगड़ती स्थिति पर चिंता
नेताप्रतिपक्ष प्रतिनिधि, जिला कांग्रेस प्रवक्ता और पार्षद प्रतिनिधि अजय डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर (एडवोकेट) ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से नगर पालिका में अव्यवस्था बढ़ती जा रही है। उनके अनुसार छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए वार्ड स्तर पर इंजीनियर द्वारा अनुमान (एस्टीमेट) तक तैयार नहीं किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारी अपने कार्यालय में उपलब्ध नहीं होते और फोन पर भी संपर्क नहीं हो पाता, जिससे जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा होने के साथ-साथ शहर की समस्याएं लंबित रहती हैं।
कार्यालय में चोरी और कार्रवाई न होने का आरोप
ठाकुर ने यह भी दावा किया कि नगर पालिका कार्यालय में चोरी की घटनाएं सामने आईं, लेकिन इस संबंध में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई। उन्होंने डस्टबिन खरीद, वाहन के पार्ट्स चोरी और जेसीबी के बकेट चोरी जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि लिखित सूचना देने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है। उनका कहना है कि अपील के बाद भी आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
जिलाधीश पर भी गंभीरता न दिखाने का आरोप
जनप्रतिनिधि के अनुसार, इन मुद्दों को लेकर कई बार जनसुनवाई में और व्यक्तिगत रूप से जिलाधीश को लिखित शिकायत दी गई तथा जांच की मांग की गई, लेकिन अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।
उन्होंने यह भी कहा कि पानी की समस्या जैसे महत्वपूर्ण विषय पर प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रमाण सहित ज्ञापन देने के बावजूद नगर पालिका पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अधिकारियों की अनुपलब्धता पर नाराजगी
ठाकुर ने बताया कि उन्होंने मुख्य नगर पालिका अधिकारी से मिलने के लिए समय मांगा, परंतु कोई जवाब नहीं मिला। साथ ही यह आरोप भी लगाया कि अधिकारी ठेकेदारों के यहां आयोजित कार्यक्रमों में नजर आते हैं, जबकि जनता से जुड़े मामलों में उदासीनता दिखाई देती है।
क्षेत्रीय इंजीनियर से कार्य प्रगति के बारे में संपर्क करने का प्रयास भी असफल रहा, जिसे उन्होंने आम नागरिकों के प्रति लापरवाही बताया।
आंदोलन की चेतावनी
जनप्रतिनिधि ने जिलाधीश से तत्काल हस्तक्षेप कर नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण लगाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो जनता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा।

Join the conversation