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🌊 धार की अनमोल विरासत: देवी सागर तालाब और जल संरक्षण का नया संकल्प

जल केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि सभ्यता की धड़कन है। जहां पानी ठहरता है, वहीं इतिहास जन्म लेता है और संस्कृति विकसित होती है। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक नगर धार में स्थित देवी सागर तालाब इसी विरासत का जीवंत प्रमाण है — एक ऐसा जलाशय जो सदियों से शहर की प्यास बुझाने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को भी पोषित करता आया है।
आज, जब जल संकट वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है, तब इस तालाब का संरक्षण केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है।
🌍 विश्व वेटलैंड दिवस पर जागी संरक्षण की चेतना

2 फरवरी 2026 को विश्व वेटलैंड दिवस के अवसर पर धार में एक उल्लेखनीय पहल देखने को मिली। राज्य स्तर पर तैयार नीतियों को जमीनी रूप देने की दिशा में नगर पालिका द्वारा एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें प्रशासन और नागरिकों ने मिलकर जल संरक्षण की आवश्यकता पर गंभीर चर्चा की।
यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं था — यह इस बात का संकेत था कि अब पर्यावरणीय नीतियां कागजों से निकलकर वास्तविक कार्ययोजना का रूप ले रही हैं।
👉 जब शासन की दूरदर्शिता और स्थानीय समुदाय की सक्रियता साथ आती है, तभी स्थायी परिवर्तन संभव होता है।
💧 देवी सागर: शहर के फेफड़े और सांस्कृतिक पहचान
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे तालाब शहरी आर्द्रभूमि (Urban Wetlands) के रूप में कार्य करते हैं — यानी वे शहर के “फेफड़ों” और “गुर्दों” की तरह प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं।
देवी सागर की प्रमुख भूमिकाएं:
✅ भूजल स्तर को स्थिर बनाए रखना
✅ स्थानीय जैव विविधता को आश्रय देना
✅ तापमान संतुलन में मदद करना
✅ बाढ़ और जलभराव के खतरे को कम करना
✅ सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को जीवित रखना
इतिहासकार मानते हैं कि धार की जल प्रबंधन परंपरा प्राचीन काल से ही अत्यंत विकसित रही है। यहां तालाब केवल जलाशय नहीं थे — वे सामुदायिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे।
🤝 “पानी सहेजने का संकल्प”: भविष्य की सुरक्षा
संगोष्ठी का सबसे प्रभावशाली पहलू वह सामूहिक प्रतिज्ञा रही, जिसमें नागरिकों और अधिकारियों ने जल संरक्षण को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी माना।
“देवी सागर की पवित्रता और अस्तित्व को बनाए रखना हमारा सामूहिक कर्तव्य है। आज लिया गया यह संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-समृद्ध भविष्य का वादा है।”
यह संदेश केवल एक शहर के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है —
यदि आज हम नहीं जागे, तो हमारी जल विरासत इतिहास की कहानी बनकर रह जाएगी।
📊 विशेषज्ञ दृष्टिकोण: शासन से जनभागीदारी की ओर बदलाव
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अक्सर योजनाएं ऊपर से बनती हैं, लेकिन उनकी सफलता स्थानीय सहभागिता पर निर्भर करती है। धार की यह पहल दर्शाती है कि अब मॉडल बदल रहा है —
👉 Top-Down → Bottom-Up Approach
यानी अब जनता केवल दर्शक नहीं, बल्कि परिवर्तन की भागीदार बन रही है।
यह एक परिपक्व प्रशासनिक सोच का संकेत है, जहां नीतियां और नागरिक प्रयास मिलकर साझा लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं।
🔮 आगे की राह: केवल उत्सव नहीं, निरंतर अभियान
देवी सागर तालाब पर केंद्रित यह पहल जल जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। लेकिन असली सफलता इस बात से तय होगी कि यह संकल्प व्यवहार में कितना उतरता है।
जल संरक्षण एक दिन का कार्यक्रम नहीं — यह निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है।
👉 छोटे कदम जो बड़ा बदलाव ला सकते हैं:
वर्षा जल संचयन को अपनाना
जल स्रोतों में कचरा न डालना
स्थानीय सफाई अभियानों में भाग लेना
पानी के दुरुपयोग को रोकना
बच्चों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना
🌱 अंतिम विचार
क्या हम अपने जल स्रोतों को बचाने के लिए केवल प्रशासन पर निर्भर रहेंगे?
या धार की इस प्रेरणादायक पहल से सीख लेकर अपने मोहल्लों और शहरों में भी संरक्षण की लौ जलाएंगे?
याद रखें —
जब एक समाज अपनी जल विरासत को बचाने के लिए खड़ा होता है, तो वह केवल पानी नहीं बचाता… वह अपना भविष्य सुरक्षित करता है।