धार में शीतलहर का कहर: तापमान 13.5 डिग्री पहुंचा, चने की फसल पर भारी संकट

 

धार में शीतलहर का प्रकोप: तापमान में गिरावट और फसलों पर संकट

मध्य प्रदेश के मालवा अंचल में स्थित धार जिले में मौसम ने अचानक करवट ली है, जिससे समूचा क्षेत्र ठिठुरन और कड़ाके की ठंड की चपेट में आ गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान धार में शीतलहर (Dhar Cold Wave) का प्रभाव इतनी तेजी से बढ़ा है कि इसने न केवल जनजीवन की रफ़्तार धीमी कर दी है, बल्कि रबी सीजन की महत्वपूर्ण फसलों के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। रणनीतिक रूप से कृषि प्रधान इस जिले में ठंड का यह तीखा प्रहार किसानों की आर्थिक स्थिति और स्थानीय खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से चिंताजनक स्थिति पैदा कर रहा है।

तापमान में आई इस अचानक अस्थिरता ने न केवल स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां पेश की हैं, बल्कि वायुमंडल में बढ़ी नमी और गिरते पारे ने मिलकर एक ऐसा मौसमी चक्र तैयार किया है, जिसका विश्लेषण करना अनिवार्य हो जाता है।

तापमान का विश्लेषण: 15.4 से 13.5 डिग्री तक की भारी गिरावट

धार में ठंड का मिजाज पिछले दो दिनों में बेहद आक्रामक हुआ है। सोमवार की तुलना में मंगलवार को दर्ज किए गए आंकड़े बताते हैं कि तापमान में गिरावट की दर सामान्य से अधिक रही है। यह महज अंकों का खेल नहीं है, बल्कि वातावरण में गलन बढ़ने का मुख्य कारण है।

तापमान की स्थिति का तुलनात्मक विवरण इस प्रकार है:

  • सोमवार का न्यूनतम तापमान: 15.4 डिग्री सेल्सियस
  • मंगलवार का न्यूनतम तापमान: 13.5 डिग्री सेल्सियस
  • कुल गिरावट: मात्र 24 घंटों में 1.9 डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज की गई।

तापमान में हुई इस कमी ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित किया है। सुबह और शाम के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है और लोग अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। न्यूनतम तापमान में इस तरह की तीव्र गिरावट से न केवल बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि पशुधन के लिए भी चारे और आश्रय का प्रबंधन कठिन होता जा रहा है। तापमान में आई इस गिरावट ने अकेले प्रहार नहीं किया, बल्कि इसके साथ आए घने कोहरे ने संकट को और गहरा कर दिया है।

कोहरे का कहर और दृश्यता पर प्रभाव

मंगलवार की सुबह धार शहर और उसके आसपास के ग्रामीण अंचल एक सफेद चादर में लिपटे नजर आए। घने कोहरे के कारण दृश्यता (Visibility) इतनी कम हो गई कि सड़कों पर वाहन रेंगते हुए दिखाई दिए। शहर के मुख्य राजमार्गों से लेकर ग्रामीण सड़कों तक, दृश्यता का स्तर 50 मीटर से भी कम दर्ज किया गया, जिससे लंबी दूरी की बसों और मालवाहक वाहनों के परिचालन में भारी देरी हुई।

इस सघन कोहरे और बढ़ती 'ठिठुरन' के कारण दैनिक मजदूर और कामकाजी वर्ग को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कोहरे के साथ चलने वाली बर्फीली हवाओं ने गलन को इतना बढ़ा दिया है कि गर्म कपड़ों की कई परतें भी नाकाफी साबित हो रही हैं। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि यदि हवा की दिशा इसी प्रकार उत्तर-पूर्वी बनी रही, तो कोहरे की सघनता आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है। कोहरे और ठंड के इस दोहरे वार ने केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि खेतों की हरियाली पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं।

कृषि संकट: चने की फसल पर वैज्ञानिक जोखिम बनाम गेहूं की अनुकूलता

एक कृषि विशेषज्ञ के नजरिए से देखें तो वर्तमान मौसम गेहूं और चने जैसी प्रमुख रबी फसलों के लिए विरोधाभासी परिणाम लेकर आया है। जहां गेहूं की फसल को इस ठंड से संजीवनी मिल रही है, वहीं चने की फसल के लिए यह स्थिति विनाशकारी साबित हो सकती है।

नीचे दी गई तालिका फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव का संक्षिप्त विवरण प्रदान करती है:

फसल का प्रकार

वर्तमान स्थिति और विशेषज्ञ विश्लेषण

गेहूं की फसल (Wheat)

वर्तमान में स्थिति पूरी तरह अनुकूल है। गेहूं एक 'C3' पौधा है जिसे वानस्पतिक विकास के लिए ठंडे मौसम की आवश्यकता होती है। इससे कल्लों (tillering) की संख्या बढ़ती है।

चने की फसल (Chana)

अत्यधिक जोखिम की स्थिति। चने में इस समय फूल आने या फलियां बनने की प्रारंभिक अवस्था है। कोहरा और पाला (Frost) फूलों को झड़ा सकता है और परागण की प्रक्रिया को बाधित कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चने की फसल में 'पाले' (Frost) की मार पड़ने की प्रबल संभावना है। जब रात का तापमान बहुत कम हो जाता है और कोहरा गिरता है, तो पौधों की कोशिकाओं के भीतर का पानी जम जाता है, जिससे कोशिकाएं फट जाती हैं (Cell Rupture)। इसे ही बोलचाल की भाषा में फसल का जलना या पाला लगना कहते हैं। चने के पौधों में नमी के अधिक संचय और उनकी कोमल संरचना के कारण उन पर इस ठंड का असर सबसे पहले और सबसे घातक होता है। इस कृषि संकट की जमीनी हकीकत को समझने के लिए जब हमने खेतों का रुख किया, तो किसानों के चेहरों पर साफ तौर पर चिंता की लकीरें दिखाई दीं।

जमीनी हकीकत: किसान अजय सिंह का वक्तव्य और पैदावार की चिंता

धार के ग्रामीण क्षेत्र के प्रगतिशील किसान अजय सिंह ने इस मौसमी बदलाव को अपनी कड़ी मेहनत के लिए एक बड़ी चुनौती बताया है। उनके अनुसार, किसान साल भर इस सीजन की प्रतीक्षा करता है, लेकिन प्रकृति का अनिश्चित व्यवहार उनकी उम्मीदों पर पानी फेर सकता है।

अजय सिंह के अनुभव और उनकी आशंकाओं को निम्नलिखित उद्धरण के माध्यम से समझा जा सकता है:

"हमने बड़ी उम्मीदों के साथ चने की बुवाई की थी, लेकिन पिछले दो दिनों से जो कोहरा और गलन बढ़ी है, उसने हमारी चिंता बढ़ा दी है। यदि मौसम का यही मिजाज बना रहा और सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए, तो चने की पैदावार में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। तापमान का यह उतार-चढ़ाव पौधों के विकास को रोक देता है और फलियां खाली रह सकती हैं।"

अजय सिंह की यह चिंता केवल उनकी व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि धार जिले के हजारों किसानों की सामूहिक व्यथा है। यदि पैदावार में कमी आती है, तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बाजार की कीमतों पर पड़ेगा।

क्षेत्रीय मौसम संदर्भ: उत्तर और मध्य भारत में गहराता संकट

धार की यह स्थिति कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि यह समूचे उत्तर और मध्य भारत में हो रहे व्यापक जलवायु परिवर्तन का हिस्सा है। स्रोत संदर्भों और मौसम विभाग की रिपोर्टों के अनुसार, पड़ोसी राज्यों और मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में स्थिति और भी गंभीर है:

  1. मध्य प्रदेश का हाल: शिवपुरी जिले से एक हृदयविदारक समाचार प्राप्त हुआ है, जहां आकाशीय बिजली गिरने से एक किसान की असामयिक मृत्यु हो गई। इसके अलावा, जबलपुर और उज्जैन संभागों में भी शीत लहर का प्रभाव तेज हो गया है।
  2. उत्तर प्रदेश में बारिश और ओलावृष्टि: लखनऊ, कानपुर और आगरा सहित उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई है। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) ने गलन को और बढ़ा दिया है, जबकि झांसी में मौसम विभाग ने 'यलो अलर्ट' जारी किया है।
  3. हिमालयी राज्यों का असर: उत्तराखंड के उत्तरकाशी और हिमाचल प्रदेश के किन्नौर व लाहौल-स्पीति जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी हो रही है। वहां से आने वाली बर्फीली हवाएं ही मालवा और धार के मैदानी इलाकों में ठिठुरन पैदा कर रही हैं।
  4. राजस्थान में चेतावनी: राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, कोटा और भरतपुर जैसे जिलों में बादल छाए हुए हैं और बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जिससे आने वाले दिनों में धार में नमी और बढ़ सकती है।

सार्वजनिक प्रभाव और संपादकीय निष्कर्ष

धार में बढ़ती शीतलहर और कोहरे की स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि प्रशासन और नागरिकों को अत्यंत सतर्क रहने की आवश्यकता है। एक वरिष्ठ संपादक के रूप में मेरा मानना है कि यह केवल मौसम का बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक संभावित कृषि आपदा का संकेत भी हो सकता है।

निष्कर्ष: धार में वर्तमान मौसमी परिस्थितियां किसानों के लिए कठिन परीक्षा की घड़ी हैं। जहां गेहूं की फसल के लिए यह ठंड वरदान साबित हो सकती है, वहीं चने के लिए यह किसी अभिशाप से कम नहीं है। जिला प्रशासन और राजस्व विभाग (Revenue Department) को अभी से सक्रिय हो जाना चाहिए। यदि ठंड का प्रकोप जारी रहता है, तो फसलों के नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए 'गिरदावरी' (Crop Survey) की प्रारंभिक तैयारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके।

साथ ही, स्वास्थ्य विभाग को ठंड जनित बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे सुबह और देर रात की यात्राओं से बचें और कोहरे के दौरान वाहनों की हेडलाइट व फॉग लाइट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। आने वाले 48 घंटे धार जिले की कृषि और जनजीवन के लिए अत्यंत निर्णायक साबित होने वाले हैं।



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